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PBL पर राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन, वार्षिक कार्य योजना पर रहा फोकस

शिक्षा विभाग द्वारा प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग पर राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें वार्षिक योजना, समीक्षा और रणनीति तय की गई। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने 'चेष्टा' पुस्तिका का लोकार्पण भी किया।

शिक्षा विभाग, बिहार के अंतर्गत SCERT और बिहार शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा पटना के होटल पाटलिपुत्र निर्वाणा में प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग (PBL) कार्यक्रम पर एक राज्यस्तरीय कार्य योजना निर्माण कार्यशाला-सह-समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें मंत्रा4चेंज की तकनीकी सहभागिता रही। इस कार्यशाला का उद्देश्य था — PBL कार्यक्रम की अब तक की प्रगति की समीक्षा करना, चुनौतियों और उपलब्धियों पर चर्चा करना तथा शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए रणनीतिक कार्य योजना तैयार करना, ताकि विद्यालय स्तर पर इसका सुनियोजित और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

कार्यशाला में शिक्षा अधिकारियों और विशेषज्ञों ने रखे विचार

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) की संयुक्त निदेशक डॉ. रश्मि प्रभा, डॉ. जमाल मुस्तफा (DPO, पटना) तथा मंत्रा4चेंज से नीरज दास गुरु की उपस्थिति रही। तीनों अधिकारियों ने संयुक्त रूप से विज्ञान विषय से जुड़ी प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग हस्तपुस्तिका ‘चेष्टा’ का लोकार्पण किया।

डॉ. जमाल मुस्तफा ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा, “PBL शिक्षकों के लिए न केवल एक प्रभावी प्लेटफ़ॉर्म है, बल्कि इससे छात्रों की रचनात्मकता और समझ दोनों का विकास होता है।” उन्होंने यह भी कहा, “सीमित संसाधनों के बावजूद भी शिक्षकों को नवाचार के लिए प्रेरित किया जा सकता है — बशर्ते प्रधानाध्यापक और टीम मिलकर साथ काम करें।”

‘बेसलाइन टेस्ट’ पर रहा ज़ोर

SCERT की संयुक्त निदेशक डॉ. रश्मि प्रभा ने कार्यशाला के दौरान PBL से जुड़े बेसलाइन टेस्ट की आवश्यकता, प्रक्रिया और प्रासंगिकता पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने जिलों में इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित समूहों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए, ताकि PBL की गुणवत्ता और सटीक मूल्यांकन सुनिश्चित किया जा सके।

जिलावार समीक्षा और लक्ष्य निर्धारण

BEPC के राज्य साधनसेवी संजीत कुमार ने कार्यशाला में उपस्थित जिला तकनीकी समूह के सदस्यों एवं जिला शिक्षक समन्वयकों के साथ जून माह के PBL-MIP की जिलावार समीक्षा की। उन्होंने उन जिलों को प्रोत्साहित किया जहां अपेक्षित प्रगति नहीं दिखी और कहा कि सामूहिक अकादमिक और प्रशासनिक सहयोग से हर जिले में बदलाव संभव है। उन्होंने विशेष रूप से मधेपुरा और वैशाली जिलों के नवाचारों का उल्लेख करते हुए अन्य जिलों को उनसे प्रेरणा लेने का सुझाव दिया।

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