पटना : रविवार रात से शुरू होकर सोमवार सुबह तक लगातार हुई 12 घंटे की मूसलाधार बारिश ने पटना की सड़कों और गलियों को पानी से भर तो दिया, लेकिन इस बार सरकारी मशीनरी पूरी तरह हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी। जलनिकासी की व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद अब नगर विकास एवं आवास मंत्री जिबेश कुमार ने भी मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने सोमवार को एक अहम समीक्षा बैठक की और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया—”जहां भी जलजमाव की स्थिति बनी हुई है, वहां अगले 6-8 घंटे के भीतर हर हाल में पानी निकाला जाए।”
इस बैठक में पटना क्षेत्र के विधायक, विधान परिषद सदस्य, नगर विकास विभाग, बुडको और पटना नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। मंत्री ने स्वयं जनप्रतिनिधियों से उनके क्षेत्रों की स्थिति जानी और शिकायतों को बिंदुवार नोट किया। उन्होंने अधिकारियों से दो टूक कहा कि यदि ज़रूरत पड़े तो आसपास के नगर निकायों से अतिरिक्त सक्शन मशीन, डीजल पंप और तकनीकी सहयोग लिया जाए, लेकिन राजधानी के किसी भी हिस्से में रात तक जलजमाव नहीं रहना चाहिए।
शहर में 175.4 मिमी वर्षा दर्ज
पिछले 48 घंटे में पटना में दो बार भारी बारिश हुई—पहली रविवार रात से सोमवार सुबह तक और फिर सोमवार देर रात। कुल मिलाकर अब तक शहर में 175.4 मिमी वर्षा दर्ज की जा चुकी है। लगातार होती इस बारिश के बीच पटना नगर निगम (PMC) और बुडको की टीमों ने युद्धस्तर पर जलनिकासी का कार्य किया। निगम के मुताबिक, करीब 90-95% क्षेत्रों से सोमवार सुबह तक पानी निकाल लिया गया था, लेकिन बाद में हुई बारिश ने फिर से चुनौतियां खड़ी कर दीं।

मंत्री और बुडको एमडी उतरे मैदान में
मंत्री जिबेश कुमार और बुडको एमडी अनिमेष कुमार पराशर ने खुद सोमवार रात और मंगलवार को गर्दनीबाग, मीठापुर, न्यू जक्कनपुर जैसे इलाकों का दौरा कर जलनिकासी की व्यवस्था का जायजा लिया। यह निरीक्षण सिर्फ दिखावा नहीं था—बल्कि इसके बाद स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त मशीनें लगाई गईं, निचले इलाकों में सक्शन पंप तैनात किए गए और संप हाउसों की कार्यप्रणाली की निगरानी तेज कर दी गई।
नगर विकास विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह ने बताया, “हेल्पलाइन नंबर 155304 पर अब तक कुल 348 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें से अधिकांश का समाधान कर दिया गया है।” उन्होंने यह भी बताया, “पटना नगर निगम (PMC) द्वारा शहर भर में 19 क्विक रिस्पांस टीमें (QRT) लगातार फील्ड में सक्रिय हैं। ये टीमें सीसीटीवी और वॉकी-टॉकी के ज़रिए संप हाउसों के इनलेट-आउटलेट का लाइव मॉनिटरिंग कर रही हैं ताकि जलजमाव की पुनरावृत्ति न हो।”
कई संवेदनशील क्षेत्रों जैसे विधानसभा, राजेंद्र नगर, करबिगहिया, बाईपास, दीघा, एयरपोर्ट, सब्जीबाग, गाँधी मैदान और खेतान मार्केट में कुछ ही घंटों में जलनिकासी सुनिश्चित कर दी गई। वहीं, पाटलिपुत्र कॉलोनी, कंकड़बाग और किदवईपुरी जैसे क्षेत्रों से भी जलनिकासी संबंधी शिकायतें आई थीं जिन पर त्वरित कार्रवाई हुई।

फॉलो अप : पटना में जलजमाव की पुरानी कहानी टूटी? बारिश के बीच PMC की त्वरित व्यवस्था ने दिखाया असर
इस बार निगम (PMC) ने जलनिकासी के लिए न सिर्फ स्थायी संप हाउसों का सहारा लिया, बल्कि 36 अस्थायी ड्रेनेज पंपिंग स्टेशन (DPS) भी तैयार किए गए हैं, जो दानापुर से लेकर दीघा नहर तक सक्रिय हैं। इनमें ट्रॉली माउंटेड डीजल पंप लगाए गए हैं, जैसे—दीघा नहर में 16 पंप, बरमुक्ता और खानपुर में 8-8 पंप तैनात किए गए हैं।
पटना नगर निगम (PMC) इस समय कुल 364 पंपों से शहर का पानी बाहर निकाल रहा है, जिनमें 265 विद्युत चालित और 99 डीजल पंप हैं। इनमें से 256 पंप स्थायी DPS पर हैं, जबकि 83 अस्थायी DPS पर कार्यरत हैं। विभाग ने अंचलवार इन पंपों की व्यवस्था भी की है—जैसे कंकड़बाग अंचल में 46 पंप, नूतन राजधानी अंचल में 105 पंप कार्यरत हैं।
नगर आयुक्त-सह-बुडको एमडी ने स्वयं रात में विभिन्न संप हाउसों का निरीक्षण कर वस्तुस्थिति की जांच की और कर्मियों की तैनाती की समीक्षा की थी। जलनिकासी की चुनौती के बीच विभाग की रणनीति इस बार केवल ‘प्रतिक्रिया देने’ तक सीमित नहीं रही, बल्कि ‘स्थिति से एक कदम आगे’ की तैयारी नजर आई।
फिलहाल सरकार का लक्ष्य साफ है—बारिश हो सकती है, लेकिन जलजमाव नहीं होना चाहिए। मंत्री जिवेश कुमार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी इलाके में जलनिकासी में देरी हो रही है तो वहां एक-एक वरिष्ठ अधिकारी की प्रतिनियुक्ति की जाएगी।
नगर निगम (PMC) ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे जलनिकासी से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए 155304 पर संपर्क करें। हेल्पलाइन 24×7 सक्रिय है और सभी QRT टीमों को तत्काल प्रतिक्रिया देने के निर्देश दिए गए हैं।












